विचारधारा से कैसे बना ताओ धर्म

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संकलन  -मनीषी सौरभ पाण्डेय प्रमुख धराधाम
लाओत्से को लाओ-सू, लाओ-सी के नाम से भी जाना जाता है। वह चीन के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे। जो ताओ ते चिंग नाम के मशहूर उपदेशक, लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी विचारधाराओं पर आधारित धर्म को ताओ धर्म कहते हैं। उन्हें ईश्वर के तुल्य माना जाता है।
चीनी परम्परा के अनुसार लाओ-सू छठी शताब्दी ईसापूर्व में झोऊ राजवंश के काल में मौजूद थे। लाओत्से के कान अन्य लोगों की अपेक्षा काफी बड़े थे। और बड़े कान वाले लोगों को बुद्धिजीवी माना जाता है। इसलिए लाओत्से का एक नाम बड़े कानों वाला ली प्रचलित है।लाओत्से लगभग नब्बे वर्ष की आयु में इस संसार से अलविदा कह गए थे।एक विचारधारा ऐसे बनी धर्मलाओत्से की विचारधारा पर बना ताओ धर्म चीन का एक मूल धर्म और दर्शन है। ताओ एक धर्म नहीं, बल्कि एक दर्शन और जीवनशैली थी। जब बौद्ध धर्म, चीन में पहुंचा तो नेताओं ने बौद्धों से कई विचार उधार लिए और इस तरह सदियों पहले विचारधारा से शुरू हुआ ताओ दर्शन, ताओ धर्म बन गया।हालांकि बौद्ध, ताओ धर्म में अहिंसात्मक संघर्ष भी होता रहा है। लेकिन चीनी बौद्ध तथा ताओ दोनों धर्मों में अब ऐसा कुछ नहीं होता। चीन में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार 50% से 80% चीनी आबादी बौद्ध धर्म को मानती है।इसमें 50% बौद्ध और 30% ताओ आबादी है? ताओ धर्म और दर्शन, दोनो का स्रोत दार्शनिक लाओत्से द्वारा रचित ग्रन्थ दाओ-दे-चिंग और ज़ुआंग-ज़ी है। ताओ धर्म में सर्वोच्च देवी और देवता यिन और यांग हैं।देवताओं की पूजा के लिये कर्मकाण्ड किए जाते हैं और पशुओं और अन्य जीवों की बलि दिए जाने के प्रमाण मिलते हैं। लाओत्से द्वारा शुरु किया गया यह धर्म आज भी पल्लवित है।धराधाम के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए देखे    dhara dham.comMobile no -09454851731

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